शास्त्री जी एक अनुभवी वेदपाठी, ज्योतिषाचार्य, कर्मकांड विशेषज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा प्रवक्ता हैं। वैदिक परंपरा, सनातन संस्कृति, ज्योतिष, वास्तु और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से वे लोगों को शास्त्रीय और विश्वसनीय मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
हमारा उद्देश्य केवल भविष्य बताना नहीं, बल्कि वैदिक ज्ञान के आधार पर जीवन की समस्याओं का उचित समाधान, सही दिशा और सकारात्मक मार्गदर्शन देना है।
पूज्य शास्त्री श्री जिगरभाई जोशी जी का जन्म वैशाख कृष्ण अष्टमी के पावन दिन गुजरात राज्य के बनासकांठा जिले के काटेडिया नामक छोटे से ग्राम में हुआ।
पूज्य शास्त्रीजी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने मूल ग्राम काटेडिया तथा जोरणंग (मेहसाणा) में पूर्ण की। तत्पश्चात उन्होंने संस्कृत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
शास्त्रीजी ने तिरुपति (आंध्र प्रदेश) में आयोजित अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा में गुजरात का प्रतिनिधित्व करते हुए वेदान्त विषय पर अपना प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया।
प्रथमा से लेकर शिक्षाशास्त्री (B.Ed.) तक का अध्ययन पूर्ण करने के उपरान्त आज वे ज्योतिष, वैदिक कर्मकाण्ड, वास्तुशास्त्र तथा श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यों में पूर्ण समर्पण के साथ संलग्न हैं।
शास्त्रीजी बाल्यकाल से ही गोसेवा के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उनके समस्त धार्मिक कार्यों का प्रमुख उद्देश्य केवल धनार्जन नहीं, अपितु सनातन धर्म का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार है। इसी भावना से वे गोसेवा, चिकित्सालय, शिक्षा तथा अन्य सेवाभावी संस्थाओं के लिए निःशुल्क श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा का आयोजन भी करते हैं।
अब तक शास्त्रीजी ने अपने आचार्यत्व में 11 से अधिक मूर्ति-प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव सफलतापूर्वक सम्पन्न कराए हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने गृहप्रवेश, नवचण्डी, शतचण्डी, लघुरुद्र, महारुद्र, विष्णुयाग तथा अनेक भव्य वैदिक यज्ञों का मुख्य आचार्य के रूप में सफल संचालन किया है।
देश के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, प्रतिष्ठित व्यवसायी तथा फिल्म जगत से जुड़े अनेक व्यक्तित्व समय-समय पर शास्त्रीजी से पूजा, अनुष्ठान एवं यज्ञ सम्पन्न कराने हेतु उनके सान्निध्य में आते रहते हैं।
शास्त्रीजी ने कर्मकाण्ड एवं ज्योतिष के क्षेत्र में भारत के अनेक राज्यों की यात्राएँ कर वैदिक संस्कृति एवं सनातन परम्पराओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
हमारे परम मित्र होने के कारण हमें सदैव उनके सान्निध्य में रहने तथा उनके वैदिक मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त होता रहा है। इसे हम अपना परम सौभाग्य मानते हैं।
हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि पूज्य शास्त्री श्री जिगरभाई जोशी जी का जीवन इसी प्रकार वैदिक कर्मकाण्ड, ज्योतिष एवं सनातन धर्म की सेवा में निरंतर अग्रसर रहे तथा असंख्य श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी उनके ज्ञान, मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से निरंतर लाभान्वित होते रहें।
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